शनिवार, 9 अप्रैल 2016

बिहार में अब न 'देसी' मिलेगी न 'अंग्रेजी'

आभार : बीबीसी हिंदी 

2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय भारतवासियों,,
    यह देख कर अत्यंत ही खेद होता है कि जिस देश के करोणों नागरिक सूखा और गरीबी के चलते तड़प - तड़प कर जिल्लत भरी जिन्दगी जी रहे हों, उस देश के करोड़ों नागरिक इनके दुखों और परेशानियों से अनजान, बेखबर, क्रिकेट जैसे खेल (जिसका मानव जीवन के उत्थान में अंश मात्र भी योगदान न हो) का लुत्फ़ ले रहे हो,,,,,,,,
    कल्पना करिए ! अगर I P L में भारतियों द्वारा ख़रीदे गए टिकटों से कमाए गए पैसे को अय्याशियों में न उड़ा के, सूखा और गरीबी से पीड़ित किसानों और गरीबों में बाँट दिया जाये तो,,,,,?

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